स्वागतम

"मेरे अंतर का ज्वार, जब कुछ वेग से उफ़न पड़ता है,
शोर जो मेरे उर में है,कागज पर बिखरने लगता है |"
ये अंतर्नाद मेरे विचारों की अभिव्यक्ति है, जिसे मैं यहाँ आपके समक्ष रख रहा हूँ |
साहित्य के क्षेत्र में मेरा ये प्रारंभिक कदम है, अपने टिप्पणियों से मेरा मार्ग दर्शन करें |

बुधवार, 18 नवंबर 2015

रात चाँद और मैं






मेरी खिड़की से 

झांकता चाँद , 

या बूढ़ी रात के हाथों में 


पड़ा कटोरा
नील महल के 

अंधियारे आले में दीया 
या सफ़ेद रेशम का 
जगमग डोरा



चाँदी जड़ी 


खनकती रोटी

ले हाथों में 


रात है रोती

हरी दूब पर 


उसके आंसू

चाँद धरा पर 


बिखर जाएगा

जैसे मखमल पर 


पारद और मोती


~ शशि (19 नवम्बर 2013)

शनिवार, 6 दिसंबर 2014

गुरु मेरी पुजा (संकलित भजन)

 ॐ नमो शिव ॐ ॐ नमो गुरुदेव 




Lyrics in Hindi script:

जित बिठरावे.. तित ही बैठूँ, जो पहरावे.. सोई सोई पहरूं,
मेरी उनकी, प्रीत पुरानी, बेचें तो बिक जाऊँ....

गुरु मेरी पूजा, गुरु गोविंद, गुरु मेरा पारब्रह्म, गुरु भगवंत...

गुरु मेरा देव, अलख अभेवो, सर्व पूज.. चरण गुरुसेवो,
गुरु मेरी पूजा, गुरु गोविंद, गुरु मेरा पारब्रह्म, गुरु भगवंत...

गुरु का दरशन, वेख-वेख जीवां, गुरु के चरण.. धोये-धोये पीवां,

गुरु बिन अवर, नहीं मैं थाऊं, अनगिन जपहुं, गुरु-गुरु नाऊं..
गुरु मेरी पूजा, गुरु गोविंद, गुरु मेरा पारब्रह्म, गुरु भगवंत...

गुरु मेरा ज्ञान, गुरु हृदय ध्यान, गुरु गोपाल, तुरत भगवान,
गुरु मेरी पूजा, गुरु गोविंद, गुरु मेरा पारब्रह्म, गुरु भगवंत...

ऐसे गुरु को... बल-बल जाइये... आप मुक्त, मोहे तारे,


गुरु की शरण, रहो कर जोड़े, गुरु बिना... मैं नाहीं हौर,
गुरु मेरी पूजा, गुरु गोविंद, गुरु मेरा पारब्रह्म, गुरु भगवंत...

गुरु बहुत, तारे भव पार, गुरु सेवा.. जम ते छुटकार,
गुरु मेरी पूजा, गुरु गोविंद, गुरु मेरा पारब्रह्म, गुरु भगवंत...

अंधकार में, गुरुमंत्र उजारा, गुरु के संग.. सकल विस्तारा,
गुरु मेरी पूजा, गुरु गोविंद, गुरु मेरा पारब्रह्म, गुरु भगवंत...

गुरु पूरा.. पाइयै बड़भागी, गुरु की सेवा.. दुख ना लागी,
गुरु मेरी पूजा, गुरु गोविंद, गुरु मेरा पारब्रह्म, गुरु भगवंत...

गुरु का शबद, ना मेटे कोई, गुरु नानक-नानक, हर सोई,
गुरु मेरी पूजा, गुरु गोविंद, गुरु मेरा पारब्रह्म, गुरु भगवंत...

ओ॰॰ गुरु मेरा पारब्रह्म, गुरु भगवंत...


Lyrics in English

Jit bithrave.. tit hi baithu, Jo pehrave.. soi soi pehru,
Meri unki, preet purani, Bechein to bik jaau...

Guru meri pooja, Guru Govind, Guru mera Paarbrahm, Guru Bhagvant...

Guru mera Dev, alakh abhevo, Sarv puj.. charan Gurusewo,
Guru meri pooja, Guru Govind, Guru mera Paarbrahm, Guru Bhagvant...

Guru ka darshan, vekh-vekh jeeva, Guru ke charan.. dhoye-dhoye peeve,

Guru bin avar, nahi mein thau, Angin japahu, Guru-Guru naahu..
Guru meri pooja, Guru Govind, Guru mera Paarbrahm, Guru Bhagvant...

Guru mera gyan, Guru hriday dhyan, Guru Gopal, turat Bhagwan,
Guru meri pooja, Guru Govind, Guru mera Paarbrahm, Guru Bhagvant...

Aise Guru ko... bal-bal jaiye... Aap mukt, mohe tare,

Guru ki sharan, raho kar jode, Guru bina... main naahi haur,
Guru meri pooja, Guru Govind, Guru mera Paarbrahm, Guru Bhagvant...

Guru bahut, taare bhav paar, Guru sewa.. jam te chutkar,
Guru meri pooja, Guru Govind, Guru mera Paarbrahm, Guru Bhagvant...

Andhkaar mein, Gurumantr ujara, Guru ke sang.. sakal vistara,
Guru meri pooja, Guru Govind, Guru mera Paarbrahm, Guru Bhagvant...

Guru poora.. paiye badbhaagi, Guru ki sewa.. dukh na laagi,
Guru meri pooja, Guru Govind, Guru mera Paarbrahm, Guru Bhagvant...

Guru ka shabad, na mete koi, Guru Nanak-Nanak, har soyi,
Guru meri pooja, Guru Govind, Guru mera Paarbrahm, Guru Bhagvant...

O.. Guru mera Paarbrahm, Guru Bhagvant...

  
Translation:

Guru is my worship and Guru is my Lord.
Guru is my Lord Almighty and Guru is my Supreme Master.
Guru is my imperceptible and inaccessible all Luminous Lord.
All serve and worship my Guru's holy feet.
Without Guru I have no other abode.
Day and night I worship Guru's Name.
Guru is my worship and Guru is my Lord.

Guru is my Lord Almighty and Guru is my Supreme Master.

मंगलवार, 21 अक्तूबर 2014

शनिवार, 2 अगस्त 2014

ज़ज्बात

फोटो साभार : wall.alphacoders.com/

मुझे मंज़िलों की खबर नहीं
उसे रास्तों का पता नहीं
क्या करें हम कोई गिला
किसी की ये खता नहीं

मैं हारी हूँ तो सिर्फ इसलिए
की कदम तो सबसे मिला लिया
दो कदम हम फिर साथ चले 
और कर अलविदा हाथों को हिला दिया
गुम हो गए फिर वो जज्बात
क़दमों के निशां का पता नहीं
मुझे मंज़िलों की खबर नहीं
उसे रास्तों का पता नहीं

हाथों को मिलाते थे अक्सर
कुछ यूँ ही गर्मजोशी से
फिर कह जाते थे हाले दिल
कुछ आँखों से, कुछ ख़ामोशी से
साँसों की महक जो गूंजा करती
मेरी साँसों में अब रता नहीं
मुझे मंज़िलों की खबर नहीं
उसे रास्तों का पता नहीं



शुक्रवार, 24 जनवरी 2014

सुभाष, हम शर्मिंदा हैं


आज पढ़ा समाचार में,

घटना संसद के सेन्ट्रल हाल में 
मातम मन रहा था 
आजादी के नायक का 
जयंती थी आज जिसकी 
राष्ट्र के अधिनायक का 
हाय सुभाष तुम्हे नमन 
क्षमाप्रार्थी हैं, हम हतभागे हैं
भूल गए हैं तुम्हे हम 
नींद हमारी गहन, हम कब जागे हैं 

धिक्कार तुम्हे है नेताओं 
जो तुम उस नेता को भूल गए 
मर चुकीं तुम्हारी आत्माएं 
तुम आजादी के प्रणेता को भूल गए 
धिक्कार तुम्हारी माताओं को
धिक्कार तुम्हारे कुल को है 
माँ भारती का धिक्कार लगे 
धिक्कार तुम्हारे समूल को है 

दुर्भाग्य देश का जग गया है 
सुप्त हो चूका जनजन का खून 
गिद्ध भेड़िये शीर्ष पर बैठे 
तेरे इस देश में लग चूका घुन 
हाँ अगर अल्पसंख्यक या 
पिछड़ी जाती का नाम जुड़ा होता 
तो सजा होता ये सेंट्रल हाल 
और तेरी तस्वीर पर माला पड़ा होता 
व्यर्थ गया बलिदान तुम्हारा 
काश तुम रक्त ना बहाए होते 
तब सुकून तुम्हे रहता 
आज अपनी जन्मदिवस यूँ अकेले ना मनाये होते | 
-शशि 24-01-2014
(23जनवरी 1897 को जन्मे इस महान क्रांतिकारी और हमारे प्रिय नेताजी की जयंती पर, हमारे 775 सांसदों की नींद नहीं टूटी | धिक्कार है इन नेताओं पर जो देश के शीर्ष पर बैठ हमारे स्वतंत्रता सेनानियों का अपमान कर रहे हैं | 

गुरुवार, 3 मई 2012

मुझे संभालो मेरे गुरुवर


मेरी टूटती साँसों को दिया जब सहारा
मेरी डूबती नईया को मिल गया किनारा

तुम ही तो चल रहे संग मेरे हर कदम
सन्मार्ग को दिखा दो भटके कभी ना हम

फिर से मुझे संभालो,मुझको गले लगा लो
अंधकार फिर बढ़ा है रोशन जहाँ बना दो

भटकूँ न अपने मन से, खुश रहूँ जीवन से
बस दूर तुम न करना मुझको अपने चरण से
~शशि (०३ मई २०१२, वीरवार)

शनिवार, 2 अप्रैल 2011

धोनी भयंकर




धोनी भयंकर, धोनी भयंकर
हमरे ...
धोनी भयंकर, धोनी भयंकर
धोनी ने धोया लंका को जमकर
धोनी भयंकर...

धोनी के धुरंधर सचिन तेंदुलकर
हरभजन का दूसरा, जहीर का योर्कर
युवराज तो ऐसे जैसे कलंदर
धोनी भयंकर, धोनी भयंकर
हमरे ...
धोनी भयंकर, धोनी भयंकर

गोरों* को धोया
हरामखोरों** को धोया
चोरों*** को पीटा मैदान में जमकर
धोनी भयंकर, धोनी भयंकर
हमरे ...
धोनी भयंकर, धोनी भयंकर

(* गोरों- आस्ट्रेलिया,
** हरामखोरों-पाकिस्तान,
*** चोरों- सीता माता को चुरानेवाले रावण के वंशज)

मंगलवार, 29 मार्च 2011

महामृत्युंजय मंत्र का शाब्दिक अर्थ

त्रयम्बक -तीन आँखोवाले जो संहारक हैं, महाकाल हैं, कैसे मृत्यु से मुक्त कर सकते हैं ? जब जब उनकी तीसरी आँख खुली है संहार हुआ है | फिर इस त्र्यम्बक की यजामह अर्थात आराधना क्यूँ?



आज शिवरात्रि है | भूतेश्वर भगवान शिव के लिंग रूप में प्रादुर्भाव की रात्रि | भुक्ति और मुक्ति का समायोजन की रात्रि | मन आह्लादितहै, व्रत-उपवास रखा है | "उपवास" अर्थात उप वास, अर्थात सानिध्य | शिव का सानिध्य का अवसर कैसे छोड़ सकता हूँ | सो उपवास किया है |
सुबह दैनिक क्रम में शिव का सानिध्य रहा | प्रातः मोबाइल का अलार्म महामृत्युंजय बजाया | अंतरात्मा शिव शिव हो गयी | फिर कंप्यूटर पर शिवमहिम्न स्तोत्रं और रावणकृत शिव तांडव स्तोत्रं का का पाठ एस० पि० बालासुब्रमण्यम की आवाज में सुना | सस्वर पाठ मैं भी करता रहा |
मगर जब स्वयं पूजा के लिए बैठा तो मन महामृत्युंजय मंत्र के भावार्थ पर जा अटका | मंत्र चिंतन भी एक पूजा है | बस लग गया भावार्थ ढूंढने में |
त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिम्पुष्टिवर्धनम्‌। उर्व्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योरमुक्षीय मामृतात्‌।
(भावार्थ-समस्त संसार के पालनहार तीन नेत्रों वाले शिव की हम आराधना करते हैं | विश्व में सुरभि फैलानेवाले भगवान शिव हमे मृत्यु ना की मोक्ष से हमें मुक्ति दिलायें)

इस मंत्र ने मुझे और मेरे विचारों को उद्वेलित कर दिया था | आखिर हिन्दी में जो भाव बताया गया है, इस की गहराई क्या है ?
त्रयम्बक -तीन आँखोवाले जो संहारक हैं, महाकाल हैं, कैसे मृत्यु से मुक्त कर सकते हैं ? जब जब उनकी तीसरी आँख खुली है संहार हुआ है | फिर इस त्र्यम्बक की यजामह अर्थात आराधना क्यूँ?
मृत्यु सत्य है, फिर इससे बचने के लिए, मृत्यु को अपने से दूर रखने का प्रयास क्यूँ? इसके लिए महाकाल की प्रार्थना क्यूँ? कहीं ये चापलूसी तो नहीं !!!??? गंभीर प्रश्न था जो मुझे उद्विग्न कर रहा था | फिर अचानक "हुई सहाय शारद मैं जाना" , पिताजी की कुछ बातें याद पड़ीं | आयुर्वेदिक चिकित्सक हैं, उनके द्वारा चिकित्सा के क्रम में कुछ चर्चाएँ भी होती थीं | उन्ही चर्चाओं के कुछ शब्द मेरे अन्तः मन से निकल पड़े और भावार्थ सूझ गया |
हमारे शरीर के तीन तत्व वात-पित्त-कफ का सामजस्य ही हमारे शरीर को स्वस्थ रखता है | यह आयुर्वेद का मत है | इनके असंतुलन होने पर शरीर में व्याधियां होती हैं | यही वात-पित्त और कफ हमारे शरीर के सुगन्धित धातुओं (रक्त, मांस और वीर्य) का पोषण और पुष्टि करते हैं | अगर ये धातु शरीर में पुष्ट हैं तो जरा-व्याधियां नहीं सताती |
मुझे अर्थ मिल गया था-
हम भगवान शिव की आराधना करते हैं , वो हमारे शरीर के तीनों तत्वों (वात-पित्त-कफ) के संतुलन से उत्पन्न सुगन्धित धातुओं(रक्त-माँस-वीर्य) की पुष्टि करें | जिससे हमें मृत्यु नहीं(मृत्यु सत्य है), बल्कि जरा-व्याधियों के भय से मुक्ति मिले |

रोज सुबह महामृत्युंजय मंत्र का जाप करता रहा | मगर कभी इसके भावार्थ पर नहीं सोचा | शिव की बाह्य प्रतिमा बना बस जाप करता रहा | मगर जब से इस गुह्य भाव को समझा है | ह्रदय शिव के सानिध्य में और जा रहा है | अपने शरीर में विद्यमान शिव को पहचान लिया है |
शिव के त्रिनेत्र हमेशा अधमुंदे दिखाए गए हैं | साम्य-सौम्य की प्रतिमूर्ति शिव जब रौद्र रूप धारण करते हैं तो त्रिनेत्र खुल जाते हैं | उनमे असंतुलन आ जाता है | फिर शिव संहारक बन शव की ढेर लगा देते हैं | अर्थात संसार का विनाश संभव हो जाता है | यही हाल शरीर का भी है, अगर वात-पित्त-कफ संतुलित हैं तो आप स्वस्थ हैं | अन्यथा इनके असंतुलन से व्याधियां आ सकती हैं और मृत्यु भी निश्चित है|
शिव जब शांत होते हैं तो काल कूट हलाहल का भी शमन कर लेते हैं | वही हाल इस शरीर रूपी शिव का भी है | जब स्वस्थ है, संतुलित है तो यह भी बाह्य विषाणुओं का शमन कर लेता है |
इस महाशिवरात्रि भगवान शिव से यही प्रार्थना है की समस्त मनुष्यों के शरीर में विद्यमान शिव की उर्जा को उर्ध्व गति दें | जिससे उनमें मृत्यु का भय समाप्त हो सके |

(दिल्ली, महाशिवरात्रि)

गुरुवार, 17 मार्च 2011

ये कैसा तांडव इस फाल्गुन में....

हे नटराज ! ये कैसा तांडव,

भंग के उमंग में

धरती डोली, सागर उफना

कुछ अलग तरंग में


चिलम कि तेरी आग बुझी तो

बडवानल बुला लिया

धूनी कि पड़ी राख कम तो

सारा शहर जला दिया


काम दमन करने वाले,

इस फाल्गुन में क्यूँ बौराये

कैलास का मंच क्या कम था

जो जापान में जा समाये


काल कूट को पीने वाले

क्या अब विष पचा ना पाए

क्या डगमगा गए तांडव में,

जो सुर ताल रचा ना पाए

~शशि(१७मार्च २०११)