चुनाव का त्योहार,
देश का बंटाधार |
वादों का ले पिटारा,
ईमोसनल अत्याचार |
आधारहीन जनतंत्र,
त्रिशंकु जनाधार |
झूठी कसमे झूठे वादे
और घोषणा निराधार |
उजला कपड़ा
तन से है जकड़ा ,
जिह्वा शहद
और नत मस्तक,
मन में छुपा
पैनी तलवार |
दल बदल
और खींचातानी
पैसा बहता
जैसे पानी|
देश की तबाही
पर रो रहे हैं,
सफ़ेदपोश
घड़ियाल |